. . ख़ुदा के नाम का हम एहतिराम करते हैं मगर ग़ज़ल ये किसी बुत के नाम करते हैं . . .
. . ख़ुदा के नाम का हम एहतिराम करते हैं मगर ग़ज़ल ये किसी बुत के नाम करते हैं . . .
. . शाइबा तक नहीं शरारत का कैसी सूरत बनाए बैठे हैं . . .
. . शाइबा तक नहीं शरारत का कैसी सूरत बनाए बैठे हैं . . .
. . इस से बढ़ कर भी कोई है नाज़ुक ? रोशनी से नहाए बैठे हैं . . .
. . इस से बढ़ कर भी कोई है नाज़ुक ? रोशनी से नहाए बैठे हैं . . .
. . लिखी है क़ैस ने किसी मासूम पर किताब पढ़ पढ़ के झूमने लगीं हर बाब तितलियां . . .
. . लिखी है क़ैस ने किसी मासूम पर किताब पढ़ पढ़ के झूमने लगीं हर बाब तितलियां . . .
. . इस लिए सर झुकाए बैठे हैं दिल में दिल दार आए बैठे हैं . . .
. . इस लिए सर झुकाए बैठे हैं दिल में दिल दार आए बैठे हैं . . .
. . हाथ पर उन के तितली बैठ गई गुल सभी ख़ार खाए बैठे हैं . . .
. . हाथ पर उन के तितली बैठ गई गुल सभी ख़ार खाए बैठे हैं . . .
. . दस्त-ए-नाज़ुक पे सोचा तितली ने गुल, हिना क्यों लगाए बैठे हैं . . .
. . दस्त-ए-नाज़ुक पे सोचा तितली ने गुल, हिना क्यों लगाए बैठे हैं . . .
