. . जिस को ख़ूशबूए लब मयस्सर हो मह कदे को वो किया समझता है . . .
. . जिस को ख़ूशबूए लब मयस्सर हो मह कदे को वो किया समझता है . . .
. . अक़ल मंद आदमी, मुहब्बत को अक़ल से मावरा समझता है . . .
. . अक़ल मंद आदमी, मुहब्बत को अक़ल से मावरा समझता है . . .
. . आज के दूर में जफ़ा को क़ैस कोई कोई जफ़ा समझता है . . .
. . आज के दूर में जफ़ा को क़ैस कोई कोई जफ़ा समझता है . . .
. . रम्ज़-ए-चमन सुधर हो आँखों पे ग़ौर कर पलकें झुका के करती हैं, अٓदाब तितलियां . . .
. . रम्ज़-ए-चमन सुधर हो आँखों पे ग़ौर कर पलकें झुका के करती हैं, अٓदाब तितलियां . . .
. . लाश पर कटती है टिकट उस की! जो भी ख़ुद को ख़ुदा समझता है . . .
. . लाश पर कटती है टिकट उस की! जो भी ख़ुद को ख़ुदा समझता है . . .
. . किया ख़बर वुह नमाज़ ही हो क़बूल शेख़ जिस को क़ज़ा समझता है . . .
. . किया ख़बर वुह नमाज़ ही हो क़बूल शेख़ जिस को क़ज़ा समझता है . . .
. . में तो मंज़िल समझता हूँ उस को वुह मुझे रास्ता समझता है . . .
. . में तो मंज़िल समझता हूँ उस को वुह मुझे रास्ता समझता है . . .
