. . रम्ज़-ए-चमन सुधर हो आँखों पे ग़ौर कर पलकें झुका के करती हैं, अٓदाब तितलियां . . .


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रम्ज़-ए-चमन सुधर हो आँखों पे ग़ौर कर
पलकें झुका के करती हैं, अٓदाब तितलियां
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