मुहब्बत के दिलकश नगीने सलाम

मुहब्बत के दिलकश नगीने सलाम
मुबारक, मुक़द्दस महीने सलाम

ए क़ुरआन आवर, ए विजदान गिर
ए बख़शिश के रोशन ख़ज़ीने सलाम

अज़ानों की ठंडक, नमाज़ों की ख़ुशबू
बहुत रूह परवर  करीने सलाम

निगाहों में तौबा की रिम झिम के फूल
तिलावत से पुर नूर सीने सलाम

अजब रूह का मन ओ-सिल्वा है तू
करम ही करम के सफ़ीने सलाम

सिखाता है ग़लबा हमें नफ्स पर
तरक़्क़ी के पुर नूर ज़ीने सलाम

मना ले जो रब क़ैस रमज़ान में
कहें  उस को ग्यारह महीने सलाम
#शहज़ाद क़ैस

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