जो यहां ज़ेर हूवा सब को ज़बर लगता है

जो यहां ज़ेर हूवा सब को ज़बर लगता है
इस लिए सब से हसीन आप का दर लगता है

हम भी परदेस में जां जाने से डरते हैं हुज़ूर
पर मदीने में किसे मौत से डर लगता है

संग दिल शख़्स पे क़ुरआन मोअस्सर क्यों है ?
संग रेज़ों की तिलावत का असर लगता है

छोड़ कर गर्दिशी तस्बीह हूवा है दो नीम
आरिफ़ क़िस्सा-ए-मेराज, क़मर लगता है

जो मुहम्मद का नहीं, दुनिया को वुह जो भी लगे
अहल-ए-किरदार को वुह शख़्स सिफ़र लगता है

एक सलवात ईधर पढ़ते हैं नमनाक क़ुलूब
और फल दार शजर एक उधर लगता है

आलम-ए-मर्ग-ए-ग़ुलामान-ए-मुहम्मद भी क़ैस
नूर मलबूस अक़ीदत का सफ़र लगता है
शहज़ाद क़ैस

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